Saturday, November 17, 2018

एक दिया

एक दिया
गरीब के आंगन में
जलता देख रही हूँ
साथ देख रही हूँ
कितनी उम्मीदें
कितनी प्रार्थनाएं
जगमगाते हुए!
साल भर की थकान
एक दिए कि रोशनी में
उतरते हुए!
बच्चों को
और दिनों से अलग
जादुई आभास में
हंसते हुए!
पूरे साल का हाल
दिल दिमाग से
एक दिन के लिए
छुपाते हुए!
एक दिया
गरीब के आंगन में
जलता देख रही हूँ!

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हाइकु सफ़र

    कहां मंजिल     है किसको खबर      लंबी डगर ****'' '' '********' '' '' '' *********'...