Sunday, June 13, 2021

माँ तुम और नैनीताल का मौसम



माँ तुम और नैनीताल का मौसम, 
जैसे दोनों का आपस में कोई गहरा रिश्ता हो, 
तुम सर्दी की गुनगुनी धूप सी हो कभी, 
और कभी जून की किसी शाम, 
माल रोड में चिनार के पेड़ों को छूंकर ,
बहती ताजी हवा सी लगती हो! 
कभी बरसातों की ठंडक हो, 
कभी  फागुन के रंग में रंगी प्रकृति का रूप हो! 
माँ तुम और नैनीताल का मौसम 
जैसे एक दूसरे को अच्छे से समझते हो! 
याद है मुझे, 
जब बरसातों में लगातार बारिश के बाद, 
कुछ धूप निकलती थी, 
तब सुबह से शाम जाने कितने दिनों तक तुम, 
घर के सारे रज़ाई कंबल, 
सब बारी बारी से धूप में डालती थी, 
ताकि सीलन की अजीब गंध दूर हो सके! 
दिन भर थका देने वाले इस काम के बाद, 
जो नींद तुम्हारी वजह से मिलती थी ना, 
वो अनमोल थी!  
आज जब मुझे मालूम पड़ा 
कि कई दिनों की बारिश के बाद धूप आई है, 
तब मैं समझ गई कि, 
आज तो नैनीताल में तुम्हारे लिए, 
चौमास में असोज लगा होगा!
और आज मैं फिर से नरम एहसास को महसूस कर,
बचपन वाली अच्छी नींद सो जाऊँगी!

... Durga

Saturday, June 12, 2021

साँझ के उस एक पल में!



 दूर जब कहीं सूरज ढल रहा हो, 
तब उसे देखते हुए हम, 
मन के पंखों को फैला कर, 
दूर कहीं निकल जाते हैं! 
जब धरती और आसमान 
एक ही बिन्दु पर टिके से दिखते हैं, 
तब हम भी बीते हुए पलों, 
और आने वाले समय को, 
एक ही धागे में पिरो लेते हैं ! 
जैसे सब कुछ मन से शुरू हो कर, 
मन में ही ठहर सा गया हो! 
जब एक ही रंग में, 
रंग गई हो  बाहर और भीतर की दुनियां, 
तब  हर तरह के कोलाहल से दूर, 
कितना शांत हो जाता है मन, 
साँझ के उस एक पल में!

Saturday, May 29, 2021

लौट चलें

 जहां पंछी सुबह जगाते हैं 

जहां नदियां- झरने शोर मचाते हैं

जहां गीत गाते हैं जंगल 

जहां आवाज लगाते हैं बादल

आ चल, लौट चलें वहाँ 

जहां से मौसम हमें बुलाते हैं... 

आ चल, लौट चलें वहाँ 

जहां से चले थे... 


जहां अब भी सादगी है जीवन में 

जहां अब भी भोलापन है सीरत में 

जहां दुख में भी सब अपने हैं 

जहां लोग बेगाने कोई नहीं 

आ चल, लौट चलें वहाँ 

जहां से पर्वत हमें बुलाते हैं.. 

आ चल, लौट चलें वहाँ 

जहां से चले थे... 

Saturday, May 22, 2021

मौसम मेरे शहर का


 



बड़ा ही बेमिसाल, बड़ा सुहाना है, मौसम मेरे शहर का,
एक पुराना, गुजरा ज़माना है,  मौसम मेरे शहर का,  
कोई बीती हुई बात, या किस्सा है, मौसम मेरे शहर का, 
मेरी जिंदगी का, जैसे हिस्सा है, ये मौसम मेरे शहर का! 




Monday, May 17, 2021

भोले तेरा नाम





बनारस सी सुबह हो ...

हरिद्वार सी हो शाम ... 

चलता रहे जीवन मेरा ... 

भोले लेकर तेरा नाम ... 

Monday, May 10, 2021

हम हारे नहीं हैं




काल बना  विकराल, 

उठाए अपना भाल, 

मचा रहा  हाहाकार, 

हम थके हैं, 

थक कर गिरे हैं, 

पर इस काल से डरकर हम झुके नहीं है! 

फैल रहा अंधकार, 

हर तरफ़ लोगों की करुण पुकार, 

दे रही मानवता का कलेजा फाड़, 

हम थके हैं, 

थक कर रुके हैं, 

पर इस काल से डरकर हम पीछे मुड़े नहीं हैं! 

इसे खत्म होना होगा, 

क्योंकि..... 

इस से डरकर हम अब तक हारे नहीं हैं! 


... Durga















Friday, March 26, 2021

कविताएँ

 






सुनने और सुनाने के बीच,

समझना भुला दिया जाता है! 

शायद इसीलिए कई कविताएं,

 गुनगुनाइ जाने से पहले ही,

ख़ामोश हो जाती हैं!


... Durga


हाइकु सफ़र

    कहां मंजिल     है किसको खबर      लंबी डगर ****'' '' '********' '' '' '' *********'...